देखा है
ये दिन के उजाले में कैसा अंधेरा छाया हैं.
कमाल नै जो कुछ है देखा वही तो बताया है.
देखा है एक बस्ती मे वतन के ठेकेदारों को.
देखा है एक बस्ती मे बिकते झूठे समाचारों को.
देखा है लोगो मैं नफरत फ़ैलाने वालो को.
मंदिर मस्जिद के नाम पर खून बहाने वालों को.
देखा है झूठ के लिबास में धर्म के ठेकेदारों को.
देखा है जलते सड़क और बागवानों को.
देखा है एक बस्ती मे झुठे हुक्मरानों को.
किया हम मंदिर मस्जिद में ही फंस कर रह जाएंगे.
हम अपनी आने वाले भविष्य को मुहं किया दिखा पाएंगे.
हम उन्हें इन सब का किया कारण बताएंगे.
पूछा तो हमसे भी जाएगा न.
जब लोकतंत्र का हो रहा था कत्ल तब आप कहा थे.
किया इस सवाल का उन्हें हम जवाब दे पाएंगे.
हम उनकी आँखों मै आँखे तक नहीं मिला पाएंगे.
शर्म से झुका के गर्दन एक किनारे खड़े हो जाएंगे.
हम उन्हें बता सके उनकी आँखों मै आँखे मिला सके.
शर्म से गर्दन न झुकना पड़े.
इसलिए लोकतंत्र को हर रोज हमें बचाना होगा इन लोकतंत्र के हत्यारों से.

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